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Abstract

आज के वैज्ञानिक युग में भी गुरु ग्रंथ साहिब की शिक्षाएँ प्रसांगिक है। गुरु ग्रंथ साहिब आज भी दीन;रबद्धए दुनिया;आम जनताद्ध और सभी पक्षों का नेतृत्व करने की ताकत रखता है। गुरु ग्रंथ साहिब में उन दलित भक्तों की बाणी भी शामिल हैए जिन्हें कभी मंदिरों में पूजा करने से जाने के लिए प्रवेश भी नहीं मिलता था। पर संपादक गुरु अर्जन देव जी ने उन लोगों की रचनाओं को ष्ग्रंथष् में शामिल करके उन्हें अपनी पूजा करवाने का चमत्कार कर दिया। जब गुरुकाल थाए उस समय हिन्दुओं में वर्ण व्यवस्था हावी थीए मंदिरों में ब्राह्मणों का अधिकार था। सती प्रथा भी एक बड़ी सामाजिक बुराई थी। धार्मिक कट्टरता मुस्लिमों में भी हावी थी। मौलवी भी जबरी लोगों पर इस्लाम थोपना चाहते थे। लेकिन किसी भी सिख गुरु ने किसी धर्म को बुरा नहीं कहाए बल्कि सभी को अपने धर्म में पक्का रहने का उपदेश दिया। एकमात्र सिख धर्म ही ऐसा धर्म हैए जिसने कभी किसी को धर्मांतरण के लिए मजबूर नहीं कियाए बल्कि गुरु तेग बहादर साहिब जी ने तिलक और जनेऊ की रक्षा के लिए दिल्ली के चाँदनी चौक में शहादत दी। यहीं कारण है कि गुरु ग्रंथ साहिब मानवतावादी ग्रंथ हैए जिसमें धर्म की आध्यात्मिकए रहस्यपूर्ण व तर्कपूर्ण व्याख्या है। मनुष्य के आत्मिक विकास के लिए गुरबाणी तब भी जरूरी थी और आज भी जरूरी है। क्योंकि यह माना जाता है कि मानव के दो रूप हैए एक प्रकाशमयी मन और दूसरा अंधकारमयी मन। गुरबाणी में किसी के मन को प्रकाशवान करने की अटूट क्षमता है। साथ ही गुरु ग्रंथ साहिब में सभी को जातिए लिंगए रंग व रूप के भेदभाव को दरकिनार करके एक बराबर समझने की ताकीद है। गुरबाणी नारी को बराबर का दजा देने के साथ सभी को शिक्षित होने की भी नसीहत देती है। सरगुण और निरगुण परमात्मा के अंतर को भी गुरबाणी अपने हिसाब से परिभाषित करके मानवीय संकल्पों को राह प्रदान करती है।

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