Main Article Content

Abstract

कोरोना ने न केवल मानव मात्र को प्रभावित किया है अपितु प्राणी, प्रकृति को भी प्रभावित किया है। इससे मनुष्य को एक ऐसा सबक मिला है जिसने चुनौतियों के बीच संभावनाओं को खोजने का काम किया है। आज नये परिवेश में जीना और विपरीत परिस्थितियों में महामारी हो या अन्य परिस्थिति के लिए तैयार किया है। इस बीच भारत में भी अनेक पडावों से गुजरते हुए देश को सक्षम बनाने का कार्य किया है। भारत में कोरोना ने सबसे पहले अभिजात्य वर्ग को पकडा क्योंकि वे लोग दूसरे देशों से लेकर इस बीमारी को लेकर आए और धीरे-धीरे मजदूर वर्ग तक इसका प्रसार हुआ। इस दौरान अनेक पडाव देखने को मिले जिनमें धार्मिक, साम्प्रदायिक, सामुदायिक, राजनीतिक उथल पुथल रही। मैं धरती के भगवानों की बात अवश्य करना चाहुँगा जो दिनरात एक कर बिना अपनी जान की परवाह किए हुए मानव सेवा में जुटे हैं। हम सबको उनकी हिम्मत की दाद देनी चाहिए, दिल से सुश्रुषा करनी चाहिए जो डाक्टर, पुलिस बल एवं राहत कार्यों में लगे हुए कार्मिक एवं स्वयंसेवी निरन्तर सेवा में लगे हुए हैं। कोरोना ने स्वछता, हाईजीन एवं सोशल डिस्टेंसिंग के क्षेत्र में अभूतपूर्व जागरूकता की अलख जगायी है।

Article Details