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Abstract

किसी भी महान सभ्यता एवं संस्कृति की पहचान संकटकाल में उसकी उत्तरजीविता से होती हैप् विश्व कोविड 19 के कारण महान  संकट के दौर से गुजर रहा हैप् संस्कृति किसी भी समाज के जीवन मूल्योंए जीवन शैलीए व्यवहारोंए आदतोंए खानपानए रहनसहन इत्यादि का सम्मिलित रूप होती हैप् विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय संगठनों एवं मीडिया रिपोर्टों के आधार पर कोविड 19 के कारण विश्व भर में 1ण्50 लाख से अधिक मौतें हो चुकी हैंप् चीन से फैले अंजान कोरोना वायरस पर हुए अब तक के रिसर्च एवं अध्ययन से यह बात  सामने आई है कि इस महामारी के प्रकोप को फैलने से रोकने में असफलता का प्रमुख कारण अमेरिका सहित यूरोपियन समुदाय का सामाजिक दूरी प्रति अरुचि का भाव रहा हैप्  सामाजिक सौहार्द्रए प्रेम भाईचारा जताने के लिए हाथ मिलाने से लेकर गले मिलने तक का रिवाज कोरोना वायरस के फैलने से पहले आम थेप् यूरोप हो या सऊदीअरबए  कोरोना वायरस के कारण सभी शारीरिक दूरी का सिद्धांत मान रहे हैंप् विशेषज्ञों का मत  है कि इंसानी इतिहास में शारीरिक दूरी के सिद्धांत को मान्यता मिल गयी हैप् यह आगे तक कायम रहेगाप्  नमस्ते के रूप में भारतीय संस्कृति ने हमेशा शारीरिक दूरी के सिद्धांत को महत्व दिया हैप् कोरोना वायरस के कारण जिस तरह धार्मिक स्थलों को बंद किया गया और बड़े बड़े धार्मिक नेता संक्रमित हो गये हैं या सार्वजनिक जीवन से गायब हो गये हैं उससे धर्म आस्था की जड़ें भी कुछ कमजोर पड़ेंगीप् विशेषतरू पश्चिमी देशो में जहाँ पहले से ही धार्मिक रूप से उदासीन लोगो की संख्या काफी ज्यादा है परन्तु भारतीय परंपरा में धर्म पंथ के रूप में नहीं वरन सामाजिक व्यवस्था को स्थिरता प्रदान करने वाला तत्व माना गया हैप् श् धरति धारयति इनेन इति धर्मः

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