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Abstract

लघु राज्य के रूप में उत्तराखण्ड़ की मांग स्वतंत्रता पश्चात् से ही की जा रही थी। पृथक राज्य की माँग के पीछे उत्तराखण्ड़वासियों की वे सभी भावनाएँ छिपी थी, जिसे वे एक लम्बे समय से हृदय में संजोए हुए थे। उनका मानना था कि यदि उनका अपना राज्य होगा तो देश में इसे आदर्श राज्य के रूप में विकसित करेंगे। यहां की संस्कृति, सभ्यता को देश के अन्य भागों में पहँुचाएंगे। पृथक राज्य गठन के पश्चात् उत्तराखण्ड़ ने अनेक क्षेत्रों में विकास किया है, किंतु राज्य सरकार के समक्ष अभी भी अनेक चुनौतियाँ विद्यमान है जिनका समाधान ढँूढना अत्यन्त आवश्यक है। तभी वास्तविक रूप में राज्य गठन का उद्देश्य पूर्ण माना जा सकता है।

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