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Abstract

माता.पिता का व्यावसायिक जीवन बच्चों के व्यक्तित्व विकासए शैक्षिक उपलब्धियों एवं अन्य गतिविधियों को बहुत ज्यादा प्रभावित करता है। बच्चे की मूल प्रवृत्तियों का शोधनए उसका मानसिक एवं शारीरिक विकास इस बात पर निर्भर करता है कि वह अपनी माँ के साथ स्वयं को कितना सुरक्षित अनुभव करते हैंए उन्हे किस सीमा तक माँ से स्नेह और सद्भाव मिलता है। आज अधिकाधिक शिक्षित महिलाएँ पारिवारिक दायित्त्वों के वहन के साथ.साथ अर्थोपार्जन हेतु व्यवसायोन्मुख देखी जा सकती है। जिससे वे अपने बच्चों की उपेक्षा कर जाती हैए जिसका बाल मन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। महिलाओं द्वारा सामाजिक भूमिका के निर्वहन के साथ मातृ भूमिका निर्वहन स्वरूप दोहरी भूमिका उनके बच्चों के विकास को विशेष रूप से किस तरह से उसकी दुश्चिन्ता व समायोजन प्रभावित करते हैंए यही शोध का महत्त्वपूर्ण क्षेत्र है।

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