Main Article Content

Abstract

गोस्वामी जी ने विश्व के सम्मुख ष्सम्पूर्ण मानवष् का आदर्श रखा जिससे प्रेरणा ग्रहण की जा सकें। उनके मत में शिक्षा अर्न्तनिहित तत्व का विकास है। मानव में मानवीयता का बीज विद्यमान है। उसे विकसित कर वट वृक्ष बनाना उनकी शिक्षा का प्रयोजन है। उन्होंने मानव को महामानव बनाने का सन्देश दिया है। वस्तुतः उनकी दृष्टि ब्रह्माण्ड की विलक्षण रचना मानव के चरम विकास पर टिकी है। उनका यह सन्देश केवल उनकी शुमांशसा पर खड़ा है। मानवता के उत्थान हेतू आधारभूत सन्देश प्रतिपादित करने की दृष्टि से भी तुलसी शिक्षा शास्त्री प्रमाणित होते हैं। गोस्वामी तुलसीदास जी वैदिक संस्कृति के परमपोषक हैं। गोस्वामी तुलसीदास ने शिक्षा को ऐहिक अभ्युदय एवं पारलौकिक निःश्रेयस की प्राप्ति का साधन माना है। धर्मए अर्थ तथा काम ये ऐहिक अभ्युदय कारक त्रिवर्ग हैं निःश्रेयस;मोक्षद्ध मानव जीवन का परमपुरूषार्थ है। इन्ही की प्राप्ति शिक्षा के माध्यम से की जाती है।

Article Details