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Abstract

वर्तमान समय में हिन्दी बाल साहित्य आधुनिक साहित्य में एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है। जिसमें साहित्य की हर विधा में लेखन कार्य हो रहा है। उन विधाओं में बाल जीवनी विधा ने भी बाल साहित्य के प्रारम्भिक चरण से लेकर आज तक हमेशा विकासमान और लोकप्रिय गरीमा का उदाहरण दिया हैं। हर समझदार व सफल व्यक्ति अपनी कामयाबी का कारण किसी की प्रेरणा को मानते है और कहते है कि मेरा जीवन उनके जीवन से बहुत प्रभावित हुआ है, जिसने मुझे आगे बढ़ने का हौसला दिया। अतः बचपन में जो बाल जीवनियाँ बालमन को प्रभावित कर उन्हें कुछ विशिष्ट करने की प्रेरणा दे, हौेसलों का संचार करे वही बाल जीवनी एक उत्कृष्ट रचना सिद्ध हो सकती है। उदाहरण के लिए पेड़ का चित्र जड़ से शुरू करके ऊपर की ओर बढ़ाना चाहिए, न कि ऊपर से नीचे की ओर। अगर बुनियाद सही होगी तो इमारत भी सही होगी। क्योंकि बचपन में पड़े बीज ही, बड़े होने पर अंकुरित - पल्लवित होकर विशिष्ट व्यक्तित्व का निर्माण करते है।

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