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Abstract

आदिवासी समाज भारतीय समाज का एक अभिन्न अंग है किन्तु अपनी प्राचीन संस्कृति तथा जीवन पद्धतियों के कारण सभ्य समाज द्वारा इन्हें हाशिये पर जीने को बाध्य किया। हाशिये पर रहने के कारण आदिवासी समाज अभावपूर्ण एवं अशिक्षित जीवन जीता आया है। शिक्षा के अभाव में आदिवासी समाज अपने सभी मौलिक अधिकारों से अनभिज्ञ रहा। जिसका भरपूर लाभ अन्य समाज ने उठाया। आदिवासी समाज में सर्वाधिक शोषण का शिकार नारियाँ हुई हैं। इसका एक मात्र कारण है आदिवासी नारी के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण। आदिवासी नारी की अस्मिता को नकारते हुए उसे मात्र भोग की वस्तु समझा जाता है। यही कारण है कि आदिवासी नारियाँ अधिकतर शारीरिक शोषण का शिकार बनती हैं। अभावग्रस्त एवं अत्यंत त्रासदपूर्ण जीवन जीते हुए भी आदिवासी नारी जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में संघर्षरत देखी जाती रही है। हिन्दी उपन्यासों के माध्यम से आदिवासी नारी के त्रासदपूर्ण जीवन की अभिव्यक्ति हुई है। इस शोध पत्र में आदिवासी नारी के शोषण एवं संघर्षपूर्ण जीवन पर प्रकाश डाला जाएगा।

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