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Abstract

भूमंडलीकृत भारत में पहचान की राजनीति परंपरागत भारतीय मूल्यों पर हावी हो गई है। आज भारत में घटित प्रत्येक घटना को किसी न किसी विशिष्ट पहचान से जोड़ने का सिलसिला.सा चल पड़ा है। भूमंडलीकरण के पश्चात् भारत में लैंगिक चुनौतियाँए भाषायी चुनौतियाँ व नृजातीय पहचान की चुनौतियाँ बढ़ी है। भूमंडलीकरण के पश्चात् घरेलू हो या कार्यशील महिला दोनों ही पर ही पुरुषों द्वारा किए जा रहे अत्याचारों के मामलों में वृद्धि हुई है। अंग्रेजी भाषा ने भारत में मातृभाषाओं के अस्तित्व के समक्ष संकट खड़ा कर दिया है और नृजातीय पहचानों को लेकर भारत में होने वाली हिंसा की घटनाओं में निरंतर वृद्धि हुई है। प्रस्तुत शोध पत्र इन्हीं चुनौतियों के बारे में लिखा गया है।

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