Main Article Content

Abstract

नब्बे के दषक में वैष्वीकरण, भूमण्डलीकरण, उदारीकरण आदि शब्दों के उपयोग और इनके निमित्त प्रक्रिया में दुनिया एक होने लगी थी। आज दुनिया के विभिन्न देषों में निर्मित होने वाले उत्पाद विभिन्न देषों के स्थानीय बाजार में आसानी से उपलब्ध हैं। वैष्वीकरण के प्रभावों एवं परिणामों से भारत भी अछूता नहीं है। उत्पादों के निर्यात एवं आयात नियमित प्रक्रिया के हिस्सा बने हुए हैं परन्तु भारत जैसे विकासषील देष इस भूमण्डलीकरण के आर्थिक प्रभावों के कारण स्वयं के मझले उद्योग एवं कुटीर उद्योगों को प्रतिस्पद्र्धा वाले बाजार में नहीं टिका पा रहा है। भारत में युवा मानव श्रम सरलता से उपलब्ध है और खादी ग्रामोद्योग जैसे प्रक्रम भारत सरकार के आर्थिक सहयोग से संचालित किये जा रहे हैं। राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर खादी की पहचान बनी है परन्तु उत्पादों की गुणवत्ता अच्छी होने के बावजूद भी बाजार की प्रतिस्पद्र्धा नहीं झेल पा रहा है। लेख में खादी के भौतिक विकास एवं उत्पाद की प्रगति का विष्लेषण प्रस्तुत है।

Article Details