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हिंदी साहित्य में थर्ड जेंडर यानि तृतीय लिंगी समुदाय को उपन्यास के माध्यम से ही नहीं बल्कि कहानी विधा के माध्यम से भी विशेष पहचान मिली है। आरम्भ में इन पात्रों को कथा थोड़ा.बहुत में स्थान दिया जाता था मगर आज कथा साहित्य में इस समुदाय की मार्मिक दशा का यथार्थ चित्रण देखने को मिलता है। किस प्रकार यह समाज हाशिए पर रह कर जीवनयापन कर रहा है और अनेक मुश्किलों और सामाजिक अवहेलना के कारण दयनीय जीवन जीने के लिए भी मजबूर है। वैसे तो बहुत से लोग हाशिए का जीवन जीने के लिए विवश हैं लेकिन थर्ड जेंडर अथवा तृतीय लिंगी समुदाय तो स्वयं की पहचान को समझने में असमर्थ है। वह अपने शारीरिक और मानसिक असंतुलन की उदेड़.बुन में उलझ कर रह जाता है। ऐसे में इस समुदाय की व्यथा.कथा को उपन्यास तथा कहानी विधा के माध्यम से समाज के सामने रखने की पहल की है ताकि आम लोगों की संकुचित मानसिकता को बदला जा सके और तृतीय लिंगी समुदाय को विश्व में इन्सान का दर्जा मिल सके।

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