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Abstract

स्त्री जिस नाम से माताए देवीए बहनए पुत्री जैसे अनेकों संबंध संसार में प्रचलित है। जो स्नेह और ममता की मूरत है। जिसके बिना यह संसार रूपी रथ का चलना असंभव हैए आज इक्कीसवीं सदी में भी भेदभाव किया जाता है। जिसको साहित्यकारों ने अपनी कहानियों में दर्शाने का प्रयत्न किया है। साहित्य जो कि समाज का ही अंग हैए जिसमें समाज का छवि प्रतिबिंबित होता है। साहित्य ने स्त्री के साथ हो रहे भेदभाव को स्त्री लेखिकाओं के माध्यम से ही उजागर किया है।

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