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Abstract

आधुनिकता के इस दौर ने व्यक्ति की मानसिकता को किसी एक धरातल पर नहीं बल्कि सामाजिकए आर्थिकए धार्मिकए राजनीतिकए सांस्कृतिक और पर्यावरण आदि धरातलों तक बदल कर रख दिया है। यह कहना उचित होगा कि आधुनिकता ने व्यक्ति को पूर्ण रूप से अपने वश में कर रखा है। इसके प्रभाव वश व्यक्ति की सोचने.समझने की शक्ति में भी अत्यधिक मात्रा में बदलाव देखा जाता है। इसका एक प्रमुख कारण है. लोगों द्वारा ग्रामीण जीवन को छोड़ शहरी जीवन की तरफ पलायन करना। अब चाहे कोई पढ़ा.लिखा हो या अनपढ़ए हर व्यक्ति की लालसा शहर में आकर जीवन जीने की बढ़ती जाती है। ग्रामीण वासियों के लिए शहरी जीवन स्वप्न सा प्रतीत होता है और उसे जीने के लिए वे कोई.न.कोई कड़ी ढ़ूँढ़ते हैं। परन्तु इस जीवन के यथार्थ को व्यक्ति आसानी से समझ नहीं पाता है। शहर की चकाचौंध व भौतिक संसाधनों की उपलब्धता के कारण ग्रामीणवासी इसके मोहपाश में स्वतः आ जाता है। शहरी जीवन ऐसा दल.दल है जो हर व्यक्ति को अपनी चपेट में बहुत आसानी से ले लेता है। शहर की चकाचौंध गाँव में रह रहे लोगों को खेत.खलिहानोंए नदी.नालोंए पेड़.पौधों और स्वच्छता भरे जीवन से दूर कर धूल.मिट्टीए शोरगुल और संकरी गलियों और तंग मकानों में कैद कर लेती है।

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