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Abstract

साहित्य, समाज से अलग नहीं किया जा सकने वाला एक हिस्सा है। मानव समाज किसी न किसी रूप में जुड़ा रहा है। साहित्य शब्द का अर्थ ही है कि ‘हित के साथ’ या ‘हित सहित’ चलने वाला माध्यम अर्थात जो कार्य प्रत्यक्षः माता-पिता गुरूजन सदियों से अपनों के लिए करते आये हैं वही और उससे भी बड़े स्तर पर साहित्य मानव समुदाय के लिए करता आ रहा है। समाज में सामान्यतः वही साहित्य प्रचलित हो पाता है जो किसी न किसी रूप में जीवन-मूल्यों से जुड़ा हो या जीवन मूल्यों को दर्शाता हो। प्राचीन काल से ही शास्त्र विद्या और साहित्य दोनों समानांतर रूप से समाज में चले आ रहे हैं। जहाँ शास्त्र परम्परागत रूप से जीवन मूल्यों का निरूपण करते हैं वहीं साहित्य कविता, कहानी या अन्य रूपों में इसे गूँथकर निरूपित करता है। साहित्य किसी समाज के देशकाल, वातावरण, सामाजिक, राजनैतिक और आर्थिक स्थितियों को भी समझाने में मदद करता है जबकि शास्त्र में इसके लिए अलग से खास लेखन किया जाता है।

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