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Abstract

समाज के विकास में आरम्भ से लेकर परमाणु युग तक महिलाओं की अहम भूमिका रही है प् महिलाएं भारत की दौलत हैं और उन्होंने समाज का ताना बाना एक करके समाज को आगे लाने  का काम किया है और भारत को हर समय गर्वित किया। भारतीय नारी समाज के हर क्षेत्र अग्रणी हैं प् देश में  मील के पत्थर के समान बहुत बार समाज के लिए  प्रेरणा का स्रोत रही  है। भारत जैसे  लोकतांत्रिक और विकासशील देश में  विविधता में एकता भी एक प्रसिद्धि का विषय रहा है प् भारत में महिलाओं को  सम्मान अवश्य मिला है लेकिन महिलाएं पुरुषों के बराबर नहीं हैं  इसलिए अक्सर  महिलाएं सामाजिक मुद्दों के कारण भारतीय समाज में पिछड़ापन का शिकार रही हैं  जिसकी वजह से  देश में महिलाओं को बहुत से सामाजिक ए राजनितिक और आर्थिक बाधाओं का सामना करना पड़ा है। पितृसता ने महिलाओं को उपभोग की वस्तु माना है।  पुरूषों ने   महिलाओं के जीवनए उनकी योग्यता और उनकी कार्य शैली को निर्धारित करने चेष्टा की ए लेकिन यथार्थ सत्य यह है कि   महिला भी पुरूषो की भांति अपनी अलग पहचान रखती है वह अपने जीवन में उचित चुनाव करने की क्षमता रखती है। शिक्षा  के प्रचार व  प्रसार से देश मे शिक्षित महिलाओ की संख्या निरन्तर बढ़ती जा रही है औंर महिलाएं पढ़ लिख कर नौकरियां करने लगी   तथा कामकाजी महिलाओ का एक नया वर्ग चल गया । महिलाओं की आर्थिक स्थिति व्यक्तिगत रूप से समाज पर भी प्रतिबिंबित होती है। महिलाओं को एक अच्छी नौकरी ढूंढना मुश्किल है जो उनकी  शिक्षाए संस्कृतिए सामाजिक विश्वासए समुदाय और परिवार के  अनुरूप हो प् हालिया सर्वेक्षण 2019 से पता चलता है कि भारत में कामकाजी महिलाओं की संख्या में धीरे.धीरे वृद्धि हो रही है।  39ण्3ः  महिलाएं भारत में काम कर रही हैं। यहाँ सराहना की जानी चाहिए कि महिलाओं ने अपने लिए हर क्षेत्र में सफलता के  दरवाजे खोल लिए हैं प् भारत की जनगणना 2011 के अनुसार महिलाओं के लिए साक्षरता दर हमारे देश में 65ण्46ः हैं जिनमें से 25ण्6ः भारत में कामकाजी महिलाएं हैं। भारत में कामकाजी महिलाओं की संख्या में ए हमारे देश के लगभग आधे कामकाजी पुरुष शामिल हैं।  यही वजह है कि वर्ष 2019 में महिलाओं के यौन शोषण में 13ः की वृद्धि हुई है। इसके अलावा भी विविध चुनौतियाँ हैं  जो 42ः महिलाओं की विविधता की प्रगति के लिए एक बड़ी बाधा के रूप में  मौजूद हैं जैसे जहाँ  महिला नेतृत्व व्यवहार में कम हैं वहाँ बिना शर्त लिंग पूर्वाग्रह का सामना करना पड़ता है जो 21 वीं सदी के महिला सशक्तिकरण के विषय को दर्शाता है प् किसी देश का आर्थिक मानक तभी सामने आएगा जब अधिक से अधिक लैंगिक समानता हो व महिलाओं को अच्छी तरह से भुगतान और सुरक्षित वातावरण का अनुभव कराया जाए । महिलाएं पुरुषों की तुलना में अधिक समय तक काम कर सकती हैं प्  विकसित और विकासशील देशों में महिलाएं एक अद्वितीय स्थान रखती हैंए लेकिन उन्हें कई बाधाओं का सामना करना पड़ता है

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