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Abstract

भारतीय सामाजिक ढाँचे में विवाह का महत्वपूर्ण स्थान है। पुरूष के बिना नारी का, नारी के बिना पुरूष का जीवन अधुरा है। दोनों को एक दूसरे से सुख मिलता है। दोनो को आजीवन एक बन्धन में बांधने के लिए एवं सुखी परिवारिक जीवन व्यतीत करने के लिए समाज ने विवाह की स्थापना की। इस प्रकार इस शोध पत्र में संस्कृत नाटकों के माध्यम से विवाह प्रणाली के विषय पर शोध किया जाएगा।

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