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Abstract

श्रीमद्भगवद्गीता में जिस युद्ध का वर्णन है वह महाभारत का एक ऐसा युद्ध था जो दो राज्यों का नहीं बल्की दो परिवारों के बीच हुआ था। ऐसे समय में अर्जुन के हाथ कंपकंपा रहे थे। यह महान योद्धा अपना हथियार त्याग कर कोने में बैठ जाता है। युद्ध भूमि में अर्जुन को कायरों की तरह बैठा देख श्री कृष्ण अर्जुन को ज्ञानयोग का जो संदेष देता है वही उसे सही निर्णय लेने वाला मार्ग दिखता है।

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