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Abstract

स्वतंत्रता के पश्चात् ग्रामीण विकास की दिषा में अनेक प्रयास किये गये हैं। भारत में पचांयती राज ग्रामीण स्थानीय स्वषासन प्रणाली का सुचक है। भारत के समस्त राज्यों में इसका गठन राज्य विधानमण्डलों के अधिनियम द्वारा सबसे निचले स्तर पर लोकतंत्र स्थापित कर उद्धेष्य से किया गया है। संविधान के 73 वे संषोधन अधिनियम 1999 के द्वारा इसे संवैधानिक दर्जा दिया गया है। इस प्रंकार संविधान की अनुसूची मंे वर्णित राज्य सूची में पांचवीं प्रविष्टि स्थानीय शासन सं सम्बन्धित है।

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