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Abstract

समाज की भव्य और आकर्षक दिखने वाली समस्त वस्तुएं शिक्षा की ही देन हैं।शिक्षा अपने परिष्कृत एवं शुद्ध रूप में मानव को विवेकशील बनाती है। आज हमें ऐसी संस्कारी शिक्षा की आवश्यकता है, जो स्वयं के विकास के साथ-साथ स्वदेशी समाज एवं राष्ट्र का विकास करने वाले तथा विश्व कल्याण की ओर अग्रसर होने वाले सुयोग्य नागरिक तैयार कर सके। ऐसी शिक्षा की आवश्यकता है जिससे जीवन में स्वानुशासन आये, नैतिक गुणों का विकास हो, ईमानदार व जिम्मेदार नागरिक तैयार हो सकें।मनुष्य में जो विशेषता है, वह धर्म है। धर्म से ही मनुष्य वास्तव में मनुष्य बनता है। धर्म का व्यावहारिक रूप ही संस्कृति है। मनुष्य एवं अन्य प्राणियों की प्रकृति में कोई विशेष अन्तर नही है। प्रकृति में हर प्राणी अपना ही विचार करता है- विविध प्रकार के भोग, शारीरिक सुख इतना ही सीमित विचार होता है। जब संस्कारों द्वारा इस प्रकृति से ऊपर उठने का विचार होता है तो संस्कृति का आरम्भ होता है।महिला सशक्तिकरण एक व्यापक शब्द है, जिसमें अधिकारों और शक्तियों का स्वाभाविक रूप से समावेश है, यह एक ऐसी मानसिक अवस्था है, जो कुछ विशेष आन्तरिक कुशलताओं और शैक्षिक, सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक आदि परिस्थितियों पर निर्भर करती है, जिसके लिए उनके भली-भाँति क्रियान्वयन हेतु सक्षम प्रशासनिक व्यवस्था होना आवश्यक है। महिला सशक्तिकरण मुख्य रूप से नीति-निर्माण एवं निर्णय- प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करना है, इस प्रकार महिला सशक्तिकरण से तात्पर्य एक ऐसी सामाजिक प्रक्रिया से है, जिसमें महिलाओं के लिए सर्वसम्पन्न और विकसित होने हेतु सम्भावनाओं के द्वार खुले हैं, जिस समाज में महिलाओं का सम्मान होता है वहाँ देवताआंे का वास होता है, को ध्यान में रखते हुए लोगों का आचरण हो तो सशक्त महिलाएँ समाज को उन्नत बना सकेंगी।लिंग संवेदनशीलता की अवधारणा में व्यक्ति व समाज के अन्तर्सम्बंधों की समझ विद्यमान है, वहीं उसके सरोकार स्त्री-पुरुष की आपसी भूमिका और मनःस्थिति से भी जुड़े हैं। ये सरोकार ही सकारात्मकता लिए हुए हों तो महिला सशक्तिकरण को संबल प्रदान कर सकते हैं। महिलाऐं सशक्त हैं उनमें जीवंत शक्ति ;अपजंस मदमतहलद्ध जन्मजात ही होती है अपने मार्ग और ऊँचाइयां स्वयं तय कर रही है हमें अपने-आप में केवल उनके प्रति सकारात्मक सामाजिक-सांस्कृतिक समझ विकसित करनी है और धार्मिक तथा नैतिक आचरण अपनाना है। मात्र इस संकल्प से अपने समाज का 50 प्रतिशत हिस्सा स्वस्फूर्त सशक्त हो जायेगा।

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