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Abstract

भारतवर्ष अनेकता में भी एकता का देश है। यहाँ की विविधतापूर्ण संस्कृति है। मूल्यों के कारण यहाँ की संस्कृति विश्व की सबसे श्रेष्ठ संस्कृति है। यहाँ शिक्षा, संस्कृति, व्यक्ति के विकास में मूल्यों को विशेष महत्त्व है। वास्तविक रूप में मूल्य क्या है? विद्वानों ने किस प्रकार मूल्यों को परिभाषित किया है? मूल्यों का वर्गीकरण कैसे किया है? आदि विचारों से ओतप्रोत इस आलेख में मूल्य अभिधात्मकता का प्रलेखन है। वेद, उपनिषद्, गीता, रामायण, पुराण, रामचरित मानस, आगम, बाईबिल, कुरान आदि मूल्य शिक्षा के सूत्रपात ग्रन्थ हैं। इनके अध्ययन-अध्यापन से मनुष्य श्रेष्ठ गुणों से परिपूर्ण हो सकेगा।

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