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Abstract

वीरों की रणभूमि, वीरांगनाओं की जौहरभूमि, प्रेमियों की क्रीड़ाभूमि, सन्तों की साधनाभूमि, भक्तों की भावभूमि एवं साहित्यकारों की चिन्तनभूमि राजस्थान में एक ऐसा चुम्बकीय आकर्षण है जो बरबस ही लोकलोचनों को अपनी ओर आकृष्ट कर लेता है। वीरता, भक्ति और श्रृंगार की त्रिवेणी में अवगाहन कर यहां का लोकमानस अलौकिक आनन्द प्राप्त करता है। राजस्थान की संस्कृति इन्द्रधनुषी आभा के कारण अपने आप में निराली व अनूठी है। इसमें शौर्य, प्रेम, भक्ति, परोपकार, शरणागत-वत्सलता, मन व आचरण की शुद्धता एवं कष्टसहिष्णुता की सतरंगी आभा झिलमिलाती है। राजस्थान का जीवन-दर्षन दिखने में जितना सरल है, व्याख्या की दृष्टि से उतना ही गूढ़, गम्भीर एवं विस्तार से युक्त है।

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