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Abstract

भारत में आदिवासी संस्कृति विशिष्ट पहचान लिए हुए है प् भूमंडलीकरण और उदारीकरण के इस दौर में विकास और नए भारत के निर्माण के नाम पर आदिवासियों को अपनी पैतृक सम्पति को बाज़ार के भाव बेचेने और जलए जंगल एवं ज़मीन से बेदखल करने की कोशिशें हो रही हैं। फलतः आदिवासी बेदखल होकर पलायन को मजबूर हैं और इसके कारण आदिवासी भाषा एवं संस्कृति खतरे में है। आदिवासी समाज अपनी संस्कृति और भाषा को बचाने की जद्दोजहद कर रहा है। आदिवासी समाज में मौजूद परंपरागत रीति रिवाज़ों से लेकर आदिवासियों की लोक.कला तक विलुप्त होने के कगार पर पहुँच चुकी है। परन्तु फिर भीए आधुनिकता और वैश्विकरण के शिखर पर होने के  बावजूद आदिवासी लोग अपनी संस्कृति को समृद्धि के साथ समेटे हुए हैंप्  आदिवासी संस्कृति सबसे पुरानी हैप् जैसे .जैसे आर्यो का देश में वर्चस्व बढ़ने लगाए परिणामस्वरूप आदिवासी संस्कृति कमज़ोर पड़ने लगी प्  पूरे विश्व में जितनी भी संस्कृति है उनमे से आदिवासी संस्कृति सबसे विचित्र  और अनोखी है प् आदिवासी संस्कृति के पृष्ठों में मनुष्य के उत्थान पतन की कहानियांँ छिपी हुई हैं। आदिवासी समुदाय की विचारधारा शुरुआत से ही ष्जीओ और जीने दोष् की रही है प् आदिवासी संस्कृति में तीजए त्यौहारएपरम्पराए रहन सहनएधार्मिक विश्वासए सामाजिक ताना बाना सब चीज़ो की अपनी एक अलग पहचान हैप् भारत के आदिवासी लोग आज भी अपनी संस्कृति को उमंग और छाव के साथ राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करते हैं

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