Main Article Content

Abstract

समकालीन कविता आधुनिक काल के हिन्दी साहित्य की वह काव्याधारा है जिसने नयी चेतनाए नयी संवेदना और शिल्प के क्षेत्र में रूप.विधान के नए विकसित आयाम के साथ काव्य.क्षेत्र में प्रवेश किया । समकालीन कविता अपने समय और समाज का प्रामाणिक दस्तावेज है । मानवीय संवेदनाए स्त्री.अस्तित्वए स्त्री.शिक्षाए दयाए करुणाए सहानुभूति आदि का चित्रण समकालीन कविता में मिलता है । स्त्री.संवेदना की दृष्टि से अनामिकाए कात्यायनीए सविता सिंहए गगन गिलए नीलेश रघुवंशीए नील कमलए अजंता देवए निर्मला पुतुलए वीराए अनीता वर्मा आदि द्वारा लिखी गयी कविताएँ विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं । समकालीन कविता में  स्त्री.हत्या तथा भ्रूण हत्या की पीड़ाए दहेज का उत्पीड़नए यौन उत्पीड़नए स्त्री.मन की अंतर्व्यथाए असुरक्षित स्त्री.मन की भावदशाए कामकाजी स्त्री की पीड़ाए स्त्री.अस्मिताए स्त्री.मुक्ति आदि के स्वर उभर आये हैं । समकालीन कविता में समकालीन युग.बोधए सामाजिक समस्याएँए सामाजिक यथार्थ आदि का चित्रण हुआ है । समकालीन कवियों ने नारी जीवन से संबन्धित विविध पहलुओं को संवेदनात्मक दृष्टि से देखा और परखा है । समकालीन कवि अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में हो रहे नारी का शोषणए अत्याचार आदि के चित्रण करके समाज में समता लाने के लिए तत्पर दिखाई देते हैं । स्त्री.जागरण की दृष्टि से ये कविताएँ अत्यंत ही महत्वपूर्ण हैं । 

Article Details