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Abstract

वेदान्त परिभाषा, अद्वैत वेदान्त की प्रमाणमीमांसा से संबंधित महत्वपूर्ण ’प्रकरण ग्रंथ’ है। वेदान्त परिभाषा में ‘स्मृति व्यावृत्तं प्रमात्वं ‘अनधिगतबाधित- विषयज्ञानत्वम्‘ को प्रमा कहा गया है। ‘नहिं लक्षण प्रमाणाभ्यां बिना वस्तुसिद्धिः‘ अर्थात् लक्षण और प्रमाण के बिना वस्तु की प्राप्ति नहीं हो सकती। इसलिए समस्त भारतीय दार्शनिक सम्प्रदायों ने लक्षण एवं प्रमाण के संबंध में विविध प्रणालियाँ उपस्थित की हैं। किन्तु अद्वैत वेदान्त की प्रमाण विचार प्रणाली विशेष महत्व रखती है।

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