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Abstract

फुले ने समाज की रूढ़ियों एवं आडम्बरमय धर्म का विरोध किया। उन्होंने जो समाज समाहित कियाए उसमें एक.दूसरे को समाज दृष्टि से देखते एवं सहिष्णुतापूर्वक व्यवहार करते थे। व्यक्ति.निर्माणए समाज तथा राष्ट्र.निर्माण एवं विकास की भावना से यह समाज कार्य करता था। राष्ट्रीय आन्दोलन को महात्मा फुले की नीतियों से बल मिला। समाज में जागरूकता आई। लोग अधिकार एवं कर्तव्यों के प्रति सचेत हुए। भीमराव अम्बेडकर स्वयं फुले के विचारों से प्रभावित हुए। कोल्हापुर के छत्रपति शाहू एवं बड़ौदा के सायाजी गायकवाड़ ने अम्बेड़कर को आर्थिक सहायता देकर विदेश पढ़ने हेतु भेजाए यह फुले के विचारों का प्रभाव ही माना जाएगा। विश्व के सबसे बड़े प्रजातन्त्र भारत को सही अर्थों में समानताए बन्धुता एवं व्यक्ति स्वातन्त्र्या के साथ नियमितता एवं रचनात्मकता महात्मा फुले से ही मिली है। उन्होंने जो आन्दोलन चलायाए वह मानवता.रक्षक थाए उससे सर्वसमाज लाभान्वित हुआ।

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