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Abstract

शांति समाज के लिए तथा यहाँ निवास करने वाले व्यक्तियों के लिये आवश्यक हैए चूँकि व्यक्ति स्वाभाव से सामाजिक होता है तथा समाज में रहते हुए विभिन्न प्रकार के धार्मिक रीति.रिवाजों एवं मान्यताओं को अपनी आस्था के अनुरूप शांतिपूर्ण ढंग से क्रियान्वित करता है द्य अतः शांति की स्थापना में सम्मलित पाठ्यपुस्तकों की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता अतः इन पुस्तकों में ऐसे प्रकरणों को समाहित किया जाये जो बालकों में शांति के गुणों का विकास अर्थात उनमें धर्मनिरपेक्षताए भ्रातत्व भावए स्वतंत्रता व समानता की भावनाए सामाजिक न्यायए अहिंसाए तथा धार्मिक स्वतंत्रता का विकास करने में कारगर साबित हो सके

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