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भारतीय फिल्में आरंभ से ही एक सीमा तक भारतीय समाज का आईना रही हैं जो समाज कि गतिविधियों को रेखांकित करती आई हैं।वास्तव में सिनेमा और साहित्य दो पृथक विधाएँ हैंएलेकिन दोनों का पारस्पारिक संबंध बहुत गहरा है।भारतीय  सिनेमा का विकास धोंडिराज गोविंद फालके जो दादा साहब फालके के नाम से अधिक जाने जाते हैंए उन्हें भारत की प्रथम स्वदेश निर्मित फीचर फिल्म ष्राजा हरिश्चंद्रष्  बनाने का श्रेय जाता हैए जो भारतेंदु हरिश्चंद्र के नाटक पर आधारित थी। इस फिल्म ने भारतीय चलचित्र उद्योग को जन्म दिया। 1920 की शुरूआत में हिंदी सिनेमा धीरे.धीरे अपने नियमित आकार में पनपने लगा। इसी दौरान फिल्म उद्योग कानुन के दायरें में भी आ गया। समय के साथ.साथ कई नई फिल्म कम्पनियाँ और निर्माताओं का आगमन हुआ। जिसमें धीरेन गांगुलीए बाबूराव पेंटरए सचेत सिंहए चंदुलाल शाहए आर्देशिर ईरानी और  व्ही शांताराम प्रमुख थे। भारत की प्रथम बोलती फिल्म ष्आलम आराष् इम्पीरियल फिल्म कंपनी ने आर्देशिर ईरानी के निर्देशन में बनाई। इस फिल्म ने समूचे फिल्म जगत में क्रांती ला दी।

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