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Abstract

साहित्य की निर्मिती करनेवाला एकमात्र प्राणी मनुष्य है। साहित्य वह है जिसमें शब्द और अर्थ दोनों का परस्पर संबंध होता है। कुछ विद्वान साहित्य की उत्पत्ति ष्हितेन सह सहितं तस्य भावः साहित्यमष् अर्थात साहित्य शब्दार्थमयी उस रचना को कहते हैं जिसमें. लोककल्याण की भावना होती है। साहित्य को प्रेमचंद जी जीवन की आलोचना मानते हैं तो महावीर प्रसाद द्विवेदी ज्ञान राशि के संचित कोश के रूप में साहित्य का स्वीकार करते है। प्रसाद की दृष्टि में आत्मा की अनुभूतियों की रहस्यमयी अभिव्यक्ति साहित्य है। साहित्य मनुष्य के अनुभव और ज्ञान का वह रूप है जो लिपिबध्द होकर प्रकट होता है। साहित्य शब्द का प्रयोग आज बहुत व्यापक अर्थ मे लिया जाता है। समाचार पत्र से लेकर विज्ञापनों तकए सिनेमा के पोस्टरों से राजनीतिशास्त्र  तथा अर्थशास्त्र तक सभी विषयों पर लिखे गए ग्रंथों को साहित्य समझा जाने लगा है। वास्तव में व्यापक अर्थ में साहित्य शब्द का प्रयोग भ्रामक धारणापर आधारित है। साहित्य शब्द का सीमित अर्थ है. मानव.मानस की रूचि से संबंधित तथा आनंदप्रद एवं कलात्मक दृष्टि से लिखित सामग्री साहित्य है। अर्थात साहित्य उसे कहते हैं जिसमें मानव मात्र की रूचि से संबंधित विषय की लिखित सामग्री होती है और जिससे आनंद प्राप्ति और कलात्मकता की भावना विहित होती है।

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