Main Article Content

Abstract

प्राचीन कालसे भारतीय समाजमें स्री को शक्ती के रुप में स्वीकारा है स यह परंपरा बहुत प्राचीन रही है स हिंदी साहित्य में भी स्री के विविध रुपोंको साहित्य द्वारा उद्घाटीत किया है स इन बातों पर आजतक बहुत गंभीर रुप से चिंतन हुआ है स समाज में स्री कि वास्तविकता को साहित्य ने समय समय पर प्रस्तुत क्या है स हिंदी साहित्य ने स्री एवं समाज  के प्रती अपना दायित्व पुरी तरह निभाया है स अनेक साहित्यकरोंने स्री और स्री को पुरुष से अलग करनेवाली सामजिक रूढीयों का विरोध करके अपने साहित्य के मध्यम से स्री को एक नये स्वतंत्रए समानता की भूमिपर खडा करणे का प्रयास किया है स आधुनिक स्री विमर्श ने स्री को स्व अस्तित्व के साथ अपने स्वतंत्र पहचान भी दी है स वैश्वीकरण के इस युग ने स्री को नया और  खुला आकाश प्रदान किया है स पुरातन सामजिक परंपरा से दूर जाने का अब वह  प्रयास कर रही है स स्रीवादी साहित्य ने स्री के विभिन प्रश्नोंए समस्याओंको वास्तविकता के साथ पेश किया है स वैश्वीकरण के इस युग में स्री पर होनेवाले अन्यायए अत्यचार उसकी पीडा उनके विभिन प्रश्न केवल एक स्री के न रहकर समग्र स्री समाज के प्रश्न बनकर सामने आये है स वही प्रश्न स्री विद्रोह के प्रमुख कारण बने है स स्री के इसी विद्रोह ने प्रस्थापित व्यवस्था के विरुद्ध आवाज उठाया है स स्री साहित्य मूलतः पुरुष प्रधान संस्कृती के विरुद्ध का आक्रोश है स अतः निश्चित रूप स्री विमर्श का साहित्य स्री की आंतरिक  वेदनाए आक्रोशए एवं विद्रोह का साहित्य है स इस में स्वानुभूति होने के कारण इस साहित्य में स्री जीवन का यथार्थ चित्रण हुआ हैए जिसमें स्री ने स्वयं की वेदनाए पींडा और इनसे मुक्ती के साथ हि स्व कि नई पहचान का भी सफल प्रयास किया है स सामजिक दृष्टीए अनेक सामजिक बंधनों के तथा अंधविश्वासों के बावजुद भी परिवर्तन के इस युग में स्री की बदलती हुई परिस्थिती में इस स्री विमर्श के साहित्यकारों महत्वपूर्ण योगदान रहेगा स समाज  को यह साहित्य निश्चित रूप से आत्मपरीक्षण के लिए विवश करेगा स यही कारण रहा है किए हिंदी साहित्य में अनेक महिला साहित्यकारोंने स्री की विभिन्न समस्याओंए वेदनाओंए प्रश्नों एपुरुष प्रधान समाज व्यवस्था की शिकार स्री और स्री के प्रती समाज के दृष्टीकोण को अपने साहित्य के मध्यम वाणी प्रदान करणे का सफल प्रयास किया हैएजिसमें प्रमुख रूप से चित्रा मुद्गलए कृष्णासोबतीए मैत्रेयी पुष्पाए कृष्ण अग्निहोत्रीए ममता कालियाए मृदूला गर्गए मन्नू भंडारीए नासिर शर्माए सुधा अरोडा आदी का स्थान महत्वपूर्ण रहा है स इन्हीं साहित्यकारों में से एक महत्वपूर्ण नाम डॉण् प्रभा खेतान का भी है

Article Details