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Abstract

राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी स्त्री व पुरुष में किसी भी प्रकार का मतभेद नहीं रखते थे। वे मानते थे कि पुरुष की तुलना में महिलाओं के लिए कोई अयोग्यता नहीं होनी चाहिए। 19वीं शताब्दी के समाज सुधारकों मंे गाँधी जी का महिलाओं के बारे में छवि और सोच में भिन्नता पायी जाती है। गाँधी जी महिलाओं की समस्याओं पर विचार करने वाले पहले चिंतक नहीं थे। देखा जाये तो 19वीं शताब्दी के समाज सुधारकों का विश्वास सहानुभूतिपूर्ण होने के साथ-साथ संरक्षणात्मक था। वे किसी भी स्तर पर महिलाओं की सुरक्षा में विश्वास रखते थे।

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