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राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने अपने जीवन के बहुमूल्य समय को ग्रामीण क्षेत्र्ा के विकास में दिया है, उनका मानना था कि भारत के आर्थिक विकास के लिए गाँव का समृद्ध होना आवश्यक है, और यह तभी संभव है जब गाँव के उन सभी लोगों को जो आर्थिक रूप से अधिक पिछड़ें हंै, उनको विकास की प्रक्रिया से जोड़ा जाए। जिसके लिए सरकार द्वारा ग्रामीण विकास संबंधित समस्याओं का समाधान करने हेतु विभिन्न प्रकार की योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। इन्हीं योजनाओं में से एक महत्वपूर्ण योजना है, महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा)। जो ग्रामीण गरीबों की जिंदगी से सीधे तौर पर जुड़ी है, यह व्यापक विकास को प्रोत्साहित करती है। मनरेगा अधिनियम विश्व का एकमात्र्ा पहला अधिनियम है जिसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की गारंटी दी जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के परिवारों की आजीविका सुरक्षा को बढ़ाना, प्रत्येक परिवार के एक वयस्क सदस्य को एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिनों के रोजगार की गारंटी देना है। अतः वर्तंमान परिप्रेक्ष्य में ग्रामीण विकास के हित में मनरेगा की बात करे तो वास्तव में यह योजना कही-न-कही गांधीजी के सपनों को साकार करते हुए नजर आ रही है। इस शोध-पत्र्ा में शोधार्थी द्वारा गांधीजी की विचारधारा के अनुरूप महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का अध्ययन किया गया है। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए शोधार्थी ने अपने शोध में द्वितीयक आकड़ों का प्रयोग किया है।

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