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Abstract

दलित’ शब्द की व्युत्पत्ति संस्कृत धातु ‘दल’ से हुई है। जिसका अर्थ ‘फटना’, ‘खंडित होना’, इत्यादि प्राप्त होता है। डा. रामचन्द्र वर्मा ने ‘संक्षिप्त हिंदी शब्द सागर’ में ‘दलित’ का अर्थ विनष्ट किया हुआ हे, मसला हुआ, मर्दित, दबाया, रौंदा या कुचला हुआ, खण्डित किया, दिया है। डा. कुसुमलता मेधववाल ने दलित की परिभाषा इस तरह की है कि ‘‘दलित का शाब्दिक अर्थ है कुचला हुआ। अतः दलित वर्ग का सामाजिक संदर्भो में अर्थ होगा, वह जाति समुदाय जो अन्यायपूर्वक सवर्णो या उच्च जातियों द्वारा दमित किया गया हो, रौंदा गया हो। दलित शब्द व्यापक रुप में पीड़ित के अर्थ में आता है, पद दलित वर्ग का प्रयोग हिन्दू समाज व्यवस्था के अन्तर्गत परम्परागत रुप में भाद्रू माने जाने वाले वर्णो कि लिए रुढ़ हो गया है। दलित वर्गा में वे सभी जातियाँ सम्मिलित हैं, जो जाति सोपान क्रम में निम्न स्तर पर है और जिन्हे सदियों से दबाकर रखा गया है।’’

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