भारतीय संगीत में विद्यालयकरण की पृष्ठभूमि

  • Dr. Afshana Shafi

Abstract

वैदिक काल से प्रवाहित विद्या मन्दिरों की व्यवस्था पश्चातवर्ती समय में भी चलती रही। बौद्ध काल व जैन काल में तक्षशिला व काशी केन्द्र प्रमुख शिक्षा केन्द्र थे। प्राचीनकाल में संगीत की शिक्षण प्रणाली मुख्यतरू गुरूजनों पर ही आश्रित थी । जिन विद्यार्थियों की संगीत सीखने की तीव्र इच्छा होती थी। अर्थात् विशिष्ट रूचि होती थी। वह गुरू के आश्रम में कई वर्षों तक रहकर संगीत सीखते थे और गुरू गृह में रहकर गुरू सेवा भी करते थे। इसके साथ−साथ गुरू द्वारा दी गई संगीत शिक्षा भी निश्काम भाव से होती थी वह व्यक्तिगत थी संस्थागत नही थी । गुरू, विनय और साधना ने इस गुरू शिष्य परम्परा की मर्यादा को धीरे−धीरे सामान्य विद्या मन्दिरों तथा संगीतशालाओ में विलम्बित किया ।

Published
2020-02-11