परम्परा साहस है गृहस्थ जीव का विष्वास है संस्कार का, पैरों की बेड़िया नहीं

  • श्रीमती मीना शर्मा

Abstract

‘परम्परा’ का षाब्दिक अर्थ है ‘बिना व्यवधान के श्रृंखला में जारी रहना। परम्परा प्रणाली में किसी विशय या उपविशय का ज्ञान बिना किसी परिवर्तन के एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में संचारित होता है। परम्परा समाज की एक सामूहिक विरासत है जो कि सामाजिक संगठन के सभी स्तरों में व्याप्त होती है। भारत देष पूरे विष्व में अपनी संस्कृति और परम्परा के लिए प्रसिद्ध है। ये विभिन्न संस्कृति और परम्पराओं की भूमि है। भारतीय संस्कृति का मूल आधार षिश्टाचार, मान्यताएं, परम्परा एवं उसके मूल्य आदि हैं। आज जब सारे संसार की जीवन षैली में आधुनिकता का समावेष हो गया है भारतीय लोग आज भी अपनी परम्परा और मूल्यों को बनाए हुए हैं।

Published
2020-02-11