विवेकानन्द का राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य

  • नीरज कुमार राय

Abstract

विवेकानन्द का जन्म 12 जनवरी 1863 ई0 को कलकत्ता के एक क्षत्रिय परिवार में हुआ था। स्वामी जी का वास्तविक नाम नरेन्द्रनाथ दत्त था। सुन्दर शरीर के धनी स्वामी जी को कुश्ती, मुक्केबाजी, दौड़, घुड़सवारी और तैरने आदि का शौक था। रामकृष्ण से मिलने के बाद उनका अन्तर्मन काफी आलोकित हुआ। हिन्दू धर्म के विविध तत्वों से परिचित होने के अलावा उन्होंने पश्चिमी दर्शन शैली और वडर््सवर्थ के विचार, वेदांत और हीगल के आदर्शवाद एवं फ्रांस की क्रांति के तथ्यों एवं विचारों का भी अध्ययन किया। लेकिन तमाम अध्ययनों के बाद भी जब उन्हें ईश्वरीय सत्ता पर संदेह हुआ तो उनके गुरू रामकृष्ण ने पुनः अपने अध्यात्मिक प्रभाव से स्वामी जी के वैचारिक द्वंद्व को सकारात्मक दिशा दी। वे रामकृष्ण के परम् शिष्य बन गये। 23 वर्ष की अवस्था में स्वामी जी घंटो समाधि लगाते थे। लेकिन गुरू के निर्देशों के अनुरूप आध्यामिक चिंतन के साथ मानवीय दृष्टिकोण को भी अपनाने की ओर मुड़े।

Published
2020-02-11