उत्तर मध्यकालीन कवयित्रियाँ और उनका साहित्यिक अवदान

  • कपिल कुमार गौतम

Abstract

हिंदी साहित्य में उत्तर-मध्यकाल का महत्वपूर्ण स्थान है। इस काल में कवियों के द्वारा विशेष रूप से रीतिपरक साहित्य लिखा गया। साहित्य लेखन के आधार पर विद्वानों ने उत्तर-मध्यकालीन कवियों को तीन वर्गों यथा- रीति-बद्ध, रीति-सिद्ध और रीति-मुक्तमें विभक्त किया है। किन्तु बड़े ही आश्चर्य की बात है कि कवियों के इस वर्गीकरण में एक भी स्त्री कवि को सम्मिलित नहीं किया जाता है। जबकि इस काल खंड में हिंदी साहित्य लेखन करने में महिलाओं की भागीदारी भी देखी जाती है। मुख्य धारा के हिंदी साहित्येतिहास ग्रन्थों में कवयित्रियों के एक बड़े वर्ग को उपेक्षित कर दिया गया है। उत्तर मध्यकालीन कवयित्रियों ने विपरीत सामाजिक और राजनीतिक परिवेश में लोक संपृक्त विषयों को लेकर काव्य लिखा। कवयित्रियों के द्वारा विपरीत परिस्थितियों मे लिखे गए साहित्य का विशेष महत्व है।

Published
2020-02-09