लेश्या और उसके भेद में व्यक्तित्व लक्षण की अभिव्यंजना

  • प्रो बी एल जैन

Abstract

जैसी मानसिक क्षमता वैसी वैचारिकता होती हैं वैसा ही आभामण्डल होता हैं।गलत कार्य सम्पादित किये जाने वाले स्थान पर बैठने मात्र से मन में अशुभ विचार आने लग जाते है। मदिराल में बैठने पर मदिरा के विचार, वैश्यालय में बैठने पर वासना के विचार, पाकशाला में बैठने पर भोजन के विचार, शौचालय में जाने पर शौच आदि से निवृत्त होने के विचार, कचरे के ढ़ेर में दुर्गंध तथा फूलों के ढेर में सुगन्ध के विचार आते हैं। जैसे विचार होंगे लेश्यामण्डल/ आभामण्डल वैसा ही होगा। विचार परिवर्तित होने से लेश्याएँ रंग बदलती हैं।

Published
2020-02-07