‘‘छत्तीसगढ़ राज्य में पंचायतीराज व्यवस्था-एक अध्ययन”

  • डॉ.(श्रीमती) अरूंधती शर्मा
  • कु. नैनअज गल्ले

Abstract

“पंचायती राज लोकतंत्र का ही रूप हैं। जनता और सत्ता का आपसी समन्वय है। इसमें गांव से दिल्ली तक के प्रशासन के सभी स्तरों पर जनता का अधिकार हैं।“1
छत्तीसगढ़ में पंचायती राज व्यवस्था के अंर्तगत् अधिनियम में बने प्रावधान अनुसार पंचायतों में उनके महत्वपूर्ण कार्य एवं दायित्व हैं। जिनमें से पंचायतों के कामकाज का संचालन तथा पंचायतों के सम्मिलन की प्रक्रिया का अपना इस अधिनियम में महत्वपूर्ण स्थान है। अधिनियम के अध्याय 5 धारा 44 में इसका उल्लेख ळें


“पंचायती राज लोकतंत्र का ही रूप हैं। जनता और सत्ता का आपसी समन्वय है। इसमें गांव से दिल्ली तक के प्रशासन के सभी स्तरों पर जनता का अधिकार हैं।“1
छत्तीसगढ़ में पंचायती राज व्यवस्था के अंर्तगत् अधिनियम में बने प्रावधान अनुसार पंचायतों में उनके महत्वपूर्ण कार्य एवं दायित्व हैं। जिनमें से पंचायतों के कामकाज का संचालन तथा पंचायतों के सम्मिलन की प्रक्रिया का अपना इस अधिनियम में महत्वपूर्ण स्थान है। अधिनियम के अध्याय 5 धारा 44 में इसका उल्लेख है।
छत्तीसगढ़ में पंचायती राज व्यवस्था का संरचनात्मक कार्यात्मक उपागम:
छत्तीसगढ़ पंचायती राज व्यवस्था में पंचायत संस्थाओं का ढांचा तीन स्तर पर निर्मित किया गया है, जिसमें ग्राम सभा और ग्राम पंचायतों निम्न स्तर पर हैं और जिला परिषदें उच्चतम स्तर पर। इन दोनो स्तरों के मध्य में जनपद पंचायत या पंचायत समिति है। पंचायत राज के संरचनात्मक ढांचे को निम्नांकित रूपरेखा द्वारा स्पष्ट किया जा रहा है।

Published
2020-02-07