आधुनिक युग में आचार्य चाणक्य शिक्षा नीति की प्रासंगिकता

  • रजनी शर्मा
  • डॉ.मुनेन्द्र कुमार त्यागी

Abstract

भारत के गौरवशाली अतीत में अनेक महान किवदंतियां रही हैं, किन्तु आचार्य चाणक्य का नाम राष्ट्र के निर्माणकर्ता में शिखर पर चमकता है। अर्थात् हमारे राष्ट्र के निर्माण में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर माना गया है। भारत में ही नहीं अपितु विश्व में आचार्य चाणक्य का सम्मान किया जाता है। आचार्य चाणक्य को कौटिल्य, विष्णुगुप्त के नाम से भी जाना जाता है। उनकी बहुमुखी प्रतिभा एक महान ऋषि, दार्शनिक, शिक्षाविद्, प्रशासक, राजनीतिक, रणनीतिकार तथा अर्थशास्त्री की है। आचार्य चाणक्य इतिहास में सर्वप्रथम मनुष्य थे जिन्होंने अखण्ड भारत की परिकल्पना की थी। अर्थात् भारत कई उपमहाद्वीप में विभिन्न-विभिन्न छोटे राज्य में बंटे हुए थे। जिन्हें चाणक्य ने एकजुट करके मौर्य साम्राज्य की नींव डाली। आचार्य चाणक्य ने अपनी पुस्तकों अर्थशास्त्र तथा नित्यशास्त्र (जिसे चाणक्य नीति के नाम से भी जाना जाता है) के रूप में अपने अनुभवों और ज्ञान को उन पुस्तकों में उतारा है। ताकि भारतीय देशवासियों को उनके उपरान्त भी कई सदियों तक उनकी नीतियों का लाभ मिल सके। आचार्य चाणक्य द्वारा प्रणीत चाणक्य नीति मनुष्य के जीवन के प्रत्येक पहलू को शिक्षा प्रदान करती है। इस चाणक्य नीति में प्रमुख रूप से सुशिक्षा, धर्म, संस्कृति, न्याय, अनुशासन, शान्ति, विद्यार्थी जीवन आदि सर्वतोन्मुखी मनुष्य जीवन की उन्नति की झांकियां प्रस्तुत की गई हैं। प्रस्तुत शोध अध्ययन का उद्देश्य आधुनिक युग में चाणक्य शिक्षा नीति की प्रासंगिकताहै

Published
2020-02-07