वैश्विक समरसता और उच्च शिक्षा

  • डॉ. रंजीता बैद

Abstract

समरसता अर्थात् स्वातंत्र्य, समता और बंधुता का व्यवहार। समरस भाव का मतलब है दूसरों के सुख व दुःख में एकरूप होना। दूसरों के सुख और दुःख को अपना समझकर उसका अनुभव करना। विश्व का प्रत्येक राष्ट्र विकास के पथ पर निरंतर गतिमान है लेकिन फिर भी परहित, सहयोग, बन्धुत्व के भाव युवाओं में दिखाई नहीं देते। भूमण्डलीकरण के वर्तमान परिदृश्य में हमारे जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन हो रहा है और यह परिवर्तन हमारे सम्मुख कई चुनौतियों को लेकर खड़ा है - वैश्विक समरसता को विकसित करने हेतु शिक्षा को माध्यम बनाकर जनमानस में व्यापक वैश्विकता की भावना भर दी जाए। ऐसे उपाय किये जाए जिससे उनमें स्वस्थ राष्ट्रीयता के माध्यम से विश्व बन्धुत्व के भाव का विकास हो।

Published
2020-02-07