समकालीन हिन्दी उपन्यासों में मुस्लिम और महिला लेखन एक नजर में

  • डा. कल्पना मौर्य

Abstract

साहित्य समाज सापेक्ष है और साहित्यकार अपनी कलम से समाज को बदलने की क्षमता रखता है अतः उसका समकालीन परिस्थितियों से परिचित होना भी आवष्यक है। जिस साहित्य ने 150 हजार वर्ष का इतिहास पूरा कर लिया हो, उस साहित्य की रचना करने वाली भाषा का इतिहास भी अत्यधिक प्राचीन और गूढ़ है। इसका ज्ञान भी होना आवष्यक है।

Published
2020-02-07