“विद्यालय परिवेश का विभिन्न आयु वर्ग के विद्यार्थियों की वृद्धि कुशाग्रता स्तर पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन”

  • डॉ.प्रमिला दुबे

Abstract

विद्यालय एक ऐसा स्थान है जहॉ हर व्यक्ति को शिक्षा प्राप्त करने के लिए जाना ही पड़ता है । परिवार के बाद बालक विद्यालय में ही शिक्षा प्राप्त करता है । विद्यालय में बालक का शारीरिकए मानसिकए सामाजिकए सांस्कृतिकए भावनात्मक तथा बौद्धिक सभी प्रकार का विकास होता है । कक्षा शिशु से लेकर कक्षा 12 तक जिस स्थान पर औपचारिक शिक्षा दी जाती है उसे विद्यालय कहते हैं विद्यालय वह स्थान है जहां विद्यार्थी शिक्षक के सानिध्य में रहते हुए ज्ञान प्राप्त करते हैं विद्यालय में शिक्षक.शिक्षिकाओं के अतिरिक्त भौतिक सुविधाएं भी होती हैंए इन सभी को विद्यालय परिवेश की संज्ञा दी जा सकती है। विद्यालय का वातावरण वह मुख्य तत्व है जो कि विद्यार्थियों की हर एक गतिविधि को अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास करना शिक्षकों पर निर्भर करता है । प्रत्येक विषय को शिक्षक यदि प्रायोगिक तरह से बढ़ाएगा तो बालकों को वह विषय समझ में आएगा तथा उनका बौद्धिक विकास भी अधिक होता है । गणित जैसे विषय का जितना अधिक अभ्यास विद्यालय में कराया जाता है विद्यार्थियों की तार्किक क्षमता विकसित होती है इसीलिए विद्यालय परिवेश के अंतर्गत विभिन्न प्रकार की प्रयोगशाला भी आती हैं प्रयोगशाला के द्वारा विद्यार्थियों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ प्रायोगिक ज्ञान भी प्राप्ति होती है इससे उनकी बौद्धिक क्षमता का विकास होता है ।

Published
2020-02-07