ग्रामीण दलित महिलाओं की सामाजिक एवं राजकीय स्थिती का विश्लेषणात्मक अध्ययन

  • प्रमोदकुमार नंदेश्रवर

Abstract

ग्रामीण दलित महिला विषय पर सामाजिक विज्ञान में कई महत्वपूर्ण शोध और लेखन हुए हैं। भारत में दलित महिलाओं का वर्ग, महिला वर्ग से भी पृथक विशेष समस्याओं वाला वर्ग है सरकार द्वारा इनके जीवन स्तर को सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक रूप से सुधार करने की सांविधिक प्रयास उत्तरोत्तर किये जा रहे हैं परन्तु, दलित महिलाओं की समस्यायें कम नहीं हो रही हैं। भारतीय समाज की वास्तविकता, और विशिष्टता में दलित समुदाय एवं दलित महिलाओं का जाति-वर्ग-जेंण्डर के आधार पर विश्लेषण एक गतिशील प्रक्रिया है। दलित महिलाओं की स्थिति को एक समुदाय में तभी समझा जा सकता है, जब हम कुछ विवादास्पद प्रश्नों जैसे ‘अस्मिता, संस्था और स्व-निर्धारण’ का हल ढँूढ़ते हैं। समाज में दलित महिला अपनी भूमिका का निर्वहन, पालन आदि समाज और राज्य की विधि के अनुरूप करते हुए गरीबी और शोषण में सम्पूर्ण जीवन को व्यतीत करती हैं। ग्रामीण दलित महिलायें सामाजिक, आर्थिक एवं राजनैतिक स्तर पर आज भी बहुत पिछड़ी एवं कमजोर हैं। वर्तमान में लोकतंत्रात्मक अवधारणा और राज्य की विकासात्मक नीति इनके सर्वांगीण उत्थान में प्रत्यक्षतः संलग्न है। वर्तमान सरकार द्वारा दलित महिलाओं को राष्ट्र-निर्माण में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष स्तर पर जोड़ने के लिए अनेकों कौशल विकास योजनायें प्रारम्भ की गई है। प्रस्तुत शोध ग्रामीण महिलाओं की सामाजिक एवं राजकीय स्थिती का विश्लेषणात्मक अध्ययन है।

Published
2020-02-07