ई-नाम और कृषि परिदृश्य: एक सामाजिक विश्लेषण

  • नीरज कुमार राय

Abstract

राष्ट्रीय कृषि बाजार की शुरूआत सबसे महत्वपूर्ण है। इसके तहत पूरे देश को एक कृषि बाजार के तौर पर विकसिल करने की योजना बनाई गई। 14 अप्रैल, 2016 को इसकी शुरूआत हुई। फिलहाल देश के 16 राज्यों और 2 केन्द्रशासित प्रदेशों में 585 मंडिया है, जो राष्ट्रीय कृषि बाजार का हिस्सा बन चुकी है। इस योजना का पूरा नाम है इलेक्ट्राॅनिक राष्ट्रीय कृषि बाजार यानी ई-नाम और अपने पूर्ण रूप में इसकी कल्पना एक ऐसे बाजार के तौर पर की गई है, जिसमें तमिलनाडु की इरोड मंडी में उतरने वाली हल्दी जैसे ही परिसर के अंदर आए, पूरे देश में अपने-अपने कम्प्यूटर टर्मिनल पर बैठे तमाम हल्दी व्यापारियों को स्क्रीन पर उस हल्दी के आने की सूचना मिल जाए। इतना ही नहीं, उस हल्दी के तमाम गुणवत्ता मानक, जैसे नमी, टूटे नग, बाहरी तत्व, करक्यूमिन की मात्रा इत्यादि की सूचना भी व्यापारियों को स्क्रीन पर दिख सके। इसके साथ ही, मुंबई, पटना, जयपुर और भुवनेश्वर के हल्दी व्यापारी एक साथ उस उल्दी पर अपनी बोली लगा सकें। अलबत्ता ई-नाम के इस स्वरूप तक पहंुचने मंे अभी कुछ बड़ी चुनौतियां हैं, जिनसे निपटने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है। जैसे सबसे बड़ी चुनौती गुणवत्ता मानकों की विश्वसनीयता की है। माल से सैकड़ों किलोमीटर दूर बैठा व्यापारी तक तक स्क्रीन पर फ्लैश हो रहे गुणवत्ता मानकों पर भरोसा नहीं कर सकता, जब तक उन्हें किसी निश्चित स्रोत से हासिल नहीं किया गया हो। इसके लिए सभी मंडियों में क्लीनिंग, इसेईग और ग्रेडिंग यूनिट की जरूरत होगी।

Published
2020-02-08