उपनिषद् तथा गीता में सृष्टिविचार : एक अध्ययन

  • डॉ. रोहित कुमार सिंह

Abstract

भारतीय वाङ्मय में उपनिषदों का स्थान महत्वपूर्ण है तथा वे दार्शनिक और धार्मिक विचारों से पूर्ण है । इनका प्रभाव इमर्सन और थोरो[1] शापेन हावर के सर्वेश्वरवाद[2] तथा अमरीकन दार्शनिक रायस के ग्रन्थ “जगत् और व्यक्ति”[3] पर स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है। स्वामी विवेकानंद का कहना है कि भारतवर्ष में जब कभी भी आध्यात्मिक और विज्ञानवाद का प्रचार और प्रसार हुआ है तो वह उपनिषदों के सहारे हुआ ।[4] आधुनिक युग में राजाराम मोहन राय ,विवेकानंद ,स्वामी रामतीर्थ एवं अरविन्द विशेष रूप से उपनिषदों की शिक्षाओं से प्रभावित थे ।

 

[1] देखिए, दासगुप्ता एस एन इण्डियनआइडीयालिजम

[2] स्वामी रामतीर्थ के लेख

[3] रायस दि वर्ल्ड एण्ड दि इंडिविजुअल

[4] श्री अरविन्द,हेरेक्लिट्स

Published
2020-02-08