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Abstract

विकासशील देशों में कुपोषण एक प्रमुख समस्या रही हैए भारत देश भी इस समस्या से प्रारंभ से ही जुझ रहा है देश में मैदानी क्षेत्रों की तुलना में पहाड़ी एवं अन्दरूनी क्षेत्रों में यह समस्या और अधिक है । वर्तमान में तुलनात्मक रूप से देखें तो भारत में बच्चों की संख्या सर्वाधिक है । देश के विकास की कार्यसूची में बच्चों का विकास पहली प्राथमिकता हैय ऐसा इसलिए नहीं कि ये सबसे अधिक असुरक्षित हैए बल्कि इसलिए कि ये बच्चे हमारी सर्वोत्तम परिसंपत्ति है । हमारे देश के भविष्य की मानव संसाधन शक्ति है । विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार.55 प्रतिशत शिशुओं की मृत्यू का कारण प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से कुपोषण है । यह कुपोषण जनजातीय बच्चों में देखें तो और भी चुनौतिपूर्ण है । भारत में जनजातीय क्षेत्र के बच्चों में आईसीडीएस कार्यक्रम वयस्क होते बच्चों में कुपोषणय दुर्बलताय रूग्णताय और मृत्यू के दोषपूर्ण चक्र को तोड़ना आज भी चुनौती बना हुआ है । प्रस्तुत अध्ययन छत्तीसगढ़ के उत्तर बस्तर कांकेर जिला के अंतागढ़ तहसील पर आधारित हैए यह बस्तर संभाग के जनजातीय बाहुल्य क्षेत्र में से एक है ।

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