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Abstract

किसी भी कहानी या उपन्यास की सार्थकता की पहली शर्त यह होती है कि भाषा, शिल्प और प्रवाह के स्तर पर वह खुद को पढ़वा ले जाने में समर्थ हो। इस कसौटी पर रतन वर्मा का कहानी संग्रह ‘पेइंग गेस्ट’ अपनी प्रत्येक कहानी के साथ सफल संग्रह है। कहानियों को पढ़ते हुए जो पहला प्रभाव मुझ पर पड़ा, वह यह कि रतन वर्मा मानव मनोविज्ञान को चित्रित करने में सिद्धहस्त हैं। संग्रह की पहली ही कहानी ‘पेइंग गेस्ट’ मेरी इस मान्यता को स्थापित करती हुई एक सफल कहानी है। मि॰ गौरव, जो भारत से अपनी नौकरी के सिलसिले में विदेश पहुंच जाता है और कार्यभार ग्रहण करने के बाद अपने लिए किराये के घर की तलाश शुरू करता है, उसे  अपने कुलिग सेमुअल की सिफारिश से मैडम मारीडोना के यहाँ ‘पेइंग गेस्ट’ के रूप में घर उपलब्ध हो जाता है। लेकिन वहाँ रहते हुए भी अपने देश का एक-एक क्षण उसे याद आता रहता है। उस मनःस्थिति का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण कथाकार ने अत्यंत ही सूक्ष्मता से किया है।

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