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Abstract

सौन्दर्य में अंग-प्रत्यंग का चित्रण किया जाता है और इस प्रकार के वर्णन के लिए साहित्य-जगत में दो शब्द मिलते हैं- नख-शिख वर्णन और शिख-नख वर्णन। नख-शिख वर्णन दिव्य-सौन्दर्य अथवा देव सौन्दर्य के वर्णन में प्रयुक्त होता है क्योंकि देव या ईश्वर का ध्यान उसके चरणों में नतमस्तक होकर ही किया जाता है। शिख-नख वर्णन मानव सौन्दर्य के वर्णन के लिए किया जाता है क्योंकि वहाॅं भक्त और भगवान का सम्बन्ध नहीं होता, मानव-समाज का सम्बन्ध होताहै जो बहुत कुछ समता पर आधारित है। जब दो मनुष्य मिलते हैं तो एक-दूसरे के मुख की ओर ही देखते हैं और इसलिए मानव सौन्दर्य में वर्णन नख से आरम्भ न होकर, शिखा से प्रारम्भ किया जाता है। सूर-काव्य में हमें दोनों प्रकार का वर्णन मिलता

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