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Abstract

प्रस्तुत शोध अध्ययन से शोद्यार्थी के द्वारा यह ज्ञात करने का प्रयास किया कि क्या विभिन्न पारिवारिक पृष्ठभूमि वाले विद्यार्थियों की संवेगात्मक परिपक्वता में भिनन्ता होती हैघ् प्रत्येक विद्यार्थी का पालन पोषण अलग.अलग तरह के पारिवारिक वातावरण में होता है। परिवार बालक के समाजीकरण का आाधार है। परिवार में रहकर ही बालक में सांस्कृतिक मूल्यए नैतिक मूल्य एवं जीवन कौशल का विकास होता है। वर्तमान दौर में विद्यार्थियों में बढ़ती अनुशासनहीनताए मनो.शारीरिक रूप से समस्याग्रस्त होनाए शैक्षिक उपलब्धि का कम होनाए और विशेष रूप से संवेगात्मक रूप से अपरिपक्व होना आदि ऐसी अनेक समस्याये हैए  जो पारिवारिक वातावरण के सकारात्मक न होने के कारण दृष्टिगोचर हो रही है। बालको के सर्वागीण विकास करने के लिए यह जानना आवश्यक हैए कि किस तरह की पारिवारिक पृष्ठ भूमि बालकों को सांवेगिक रूप से परिपक्वबनानेमें अपना योगदान दे सकती है। सांवेगिक रूप से परिपक्व बालक ही अनूकूल एवं प्रतिकूल परिस्थितियों में स्वयं को समायोजित कर सकता है।इन महत्वपूर्ण बातों को ध्यान में रखते हुए शोधार्थी के द्वारा अपने शोध अध्ययन के लिए उच्च माध्यमिक स्तर पर अध्ययनरत् विद्यार्थियों को चुना और शोध विषय के रूप में उच्च माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों की संवेगात्मक परिपक्वता का उनके पारिवारिक पृष्ठभूमि के सन्दर्भ मेंष् तुलनात्मक अध्ययन किया। इस हेतु शोधार्थी के द्वारा नैनीताल जनपद के हल्द्वानी तहसील के अन्र्तगत राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालयों के इन्टरमीडिएट स्तर के सत्र 2018.19में अध्ययनरत विद्यार्थियों को चुना गया।तथा शोध विधि के अन्र्तगत सर्वेक्षण विधि का प्रयोग किया। इस शोध अध्ययन में उच्च माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों की संवेगात्मक परिपक्वता के मध्य सार्थक अन्तर ज्ञात करने के लिए टीष् परीक्षण का प्रयोग किया गया। शोध अध्ययन के परिणामों में पाया गया कि छात्र एवं छात्राओं के संवेगात्मक परिपवक्ता में सार्थक अन्तर नही है। शहरी एवं ग्रामीण परिवेश के विद्यार्थियो की संवेगात्मक परिपक्वता में सार्थक अन्तर नही होता है। पारिवारिक पृष्ठभूमि केआधारपर बच्चों की संवेगात्मक परिपक्वता में सार्थक अन्तर नही पाया गया।

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