Main Article Content

Abstract

भारतेंदु युग हिंदी साहित्य में कई मायनों में क्रांति का युग रहा है। हिंदी पत्रकारिता के क्षेत्र में ध्यान दें तो भारतेंदु हरिश्चंद्र के पत्र श्कविवचन सुधाश् के प्रकाशन के साथ ही हिंदी में पत्रकारिता का दूसरा युग आरंभ होता है। इस संबंध में कृष्ण बिहारी मिश्र का मत है ष्हिंदी पत्रकारिता के दूसरे दौर का आरंभ 1867 ईण् से माना जाता है। हिंदी.साहित्य का यह युग श्भारतेंदु.युगश् था। यह युग उस दरबारी संस्कृति और रीतिकालीन साहित्य पर एक प्रश्न.चिह्न था जो एक छोटी सीमा में  बंधकर रुग्ण हो गया।

Article Details